औरत की भूख

 


इक औरत को सब जानते है कभी माँ के रूप मे तो कभी बहन के रूप में तो कभी बीबी, प्रेमिका, भाभी,चाची,बेटी अनेकों रूप में लेकिन क्या सच में कोई सिर्फ औरत को जानता है ये तो सारे उसके रूप है। 

शायद नहीं 

 औरत किसी भी रूप में हो सभी की भावनाएँ इक सी होती हैं इस पुरुष प्रधान समाज में पुरुष चाहे किसी भी रूप में हो पिता, पति, बेटा, भाई या किसी भी रूप मे उससे इक औरत को केवल इक ही चीज चाहिए होती हैं 

वो हैं अपने हिस्से की इज़्ज़त, प्यार, भरोसा ,अपनापन बस इक यही चीज होती है जिसकी हर इक औरत भूखी हैं वो कुछ भी कर सकती है थोड़े से प्यार भरोसे इज़्ज़त के लिए। फिर भी उनका सब कुछ कर जाना भी ना के बराबर हो जाता हैं। 

कभी वक्त मिले तो सोचिए इक औरत की जिंदगी के बारे में जब वो दर्द में होती है तो सिर्फ आपकी खुशी देखकर अपना दर्द भूल जाती हैं।

वैसे तो सुबह सूरज के उगने से होता है पर हर घर की सुबह उस घर में रहने वालीं औरतों से होता हैं। खुद देखिए अगर इक दिन वो ना उठे तो शायद सुबह ही ना हो। सुबह की सफाई, सुबह का ऑफिस, स्कूल नाश्ता पूजा कुछ ना हो। 

सब थकते हैं पर उसको थकने की इजाज़त नहीं हैं।

आदमी 12 घंटे की जॉब करते है तो उनको खाना गरम चाहिए। थक कर आते है तो घर में सुकून चाहिए। बीबी हमेशा खिली खिली खुश दिखनी चाहिए। और औरत 24 घंटे घर देखना सुबह सबसे पहले जागना रात देर से सोना। क्या बनाना क्या खिलाना, सबको खुश रखना। उसके बाद अगर गलती से भी कोई गलती हो जाये तो सभी की नजर में जाहिल बनते देर नहीं लगती। 

इक औरत 24 घंटे की चाकरी करती है भी उसकी भूख कभी शांत नहीं होती ।नहीं चाहिए उसे 24 घंटे की परवाह,तो क्या कुछ छड़ प्यार के उसे नहीं मिल सकते। नहीं चाहिए उसे प्रमोशन ,तो क्या थोडी इज़्ज़त के भी काबिल नहीं हैं। 

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